सामाजिक सरोकार और अपराध विषयक पत्रकारिता पर असमनी की कार्यशाला
विधायक गोपाल शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा, हरीश पाराशर, ऐश्वर्या प्रधान ने किया संबोधित
अजय नागर/राष्ट्र सम्मत/जयपुर।
राज्य के सूचना एवं जनसंपर्क आयुक्त राकेश शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र को साधने में कलम का उपयोग विवेक सम्मत होना चाहिए। पत्रकारों को व्यक्तिगत लांछनों से बचना चाहिए।
शर्मा शनिवार को एसोसिएशन ऑफ स्माल एंड मीडियम न्यूजपेपर्स ऑफ इंडिया (असमनी) के तत्वावधान में कलानेरी परिसर में सामाजिक सरोकार एवं अपराध विषयक पत्रकारिता पर आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। अपने उद्बोधन में राकेश शर्मा ने कहा कि एआई के बढ़ते प्रयोग को बहुत सावधानी से उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यशाला को मीडियाकर्मियों के लिए बहुत उपयोगी बताया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर होते रहने चाहिए।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार गुलाब बत्रा ने कहा कि सामाजिक सरोकार एवं अपराध एक-दूसरे से जुड़े हैं। वर्तमान में इस विषय पर लिखना बहुत ही दुष्कर कार्य है। उन्होंने वर्तमान समय में इस विषय पर की जा रही पत्रकारिता को बहुत ही सावधानी पूर्वक किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर पत्रकार एवं विधायक गोपाल शर्मा ने समाचारों में सामाजिक सरोकारों से जुड़े पहलुओं को उजागर करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने अपराधों की रोकथाम के लिए आमजन के कड़े विरोध के प्रति जनता को जागरूक करने में समाचार पत्रों की अहम भूमिका के बारे में भी बताया। एक अपराधी का उदाहरण देकर विधायक गोपाल शर्मा ने कहा कि जेल से फरार अपराधी नाम बदलकर,पत्रकार बनकर समाज के मध्य अपनी दादागिरि कर रहा था। कैसे पुलिस ने पकड़कर उसे वापस हवालात का रास्ता दिखाया। उन्होंने पत्रकारों की मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाकर हल कराने का आश्वासन दिया।
*पत्रकारों की समस्याओं से शासन को कराया अवगत*
असमनी, राजस्थान के अध्यक्ष गोपाल गुप्ता ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि पत्रकारों की समस्याओं से मुख्यमंत्री से लेकर विशेषाधिकारी, सलाहकार, कॉर्डिनेटर एवं आयुक्त को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। गोपाल गुप्ता ने वरिष्ठ पत्रकारों की सम्मान निधि में वृद्धि, राजस्थान रोडवेज में अंतिम गंतव्य स्थल तक फ्री यात्रा, सम्मान निधि के नियमों में सरलीकरण, जिससे वांछित पत्रकार पात्र हो सकें, सर्किट हाउस में रियायती निर्धारित दर पर ठहराव व्यवस्था, लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को माह में कम से कम तीन सजावटी विज्ञापन, महाराष्ट्र की तर्ज पर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाना इत्यादि अनेकों समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष असमनी का यह पहला एकेडमिक कार्यक्रम है।
*छोटे समाचार पत्रों की खबरों पर होती है चैनलों पर बहस*
कार्यशाला को पत्रकार हरीश पाराशर ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े समाचारों को प्रमुखता दिए जाने पर जोर दिया। टीवी पत्रकार ऐश्वर्या प्रधान ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अभिव्यक्त शब्दों का विशेष महत्व होता है। कई बार छोटे समाचार पत्रों में छपी खबरों पर चैनल बहस करने पर मजबूर हो जाते हैं। मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी गोविंद पारीक अस्वस्थता के चलते नहीं आ पाए, उनका भेजा संदेश गोपाल गुप्ता ने पढ़कर सुनाया। पत्रकार मदन कलाल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, उनके वक्तव्य को अमृता मौर्य ने पढ़कर सुनाया।
*लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन*
कार्यशाला में डीग जिला स्थित बहज के टीलों से खुदाई में मिले ब्राह्मी लिपि सहित महाभारत और गुप्त कालीन पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन भी किया गया। पुरातत्व विभाग द्वारा निर्मित इस लघु वृत्तचित्र का सार्वजनिक प्रदर्शन पहली बार किया गया है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी पत्रकार बंधुओं को नए वर्ष के कैलेंडर के साथ ही अन्य सामग्री भी उपलब्ध कराई गईं। कार्यक्रम में राजेन्द्र बोडा, अशोक चतुर्वेदी, राजेंद्र राज, ललित शर्मा, पीयूष कुलश्रेष्ठ, हरिओम शर्मा, प्रकाश श्रीवास्तव, विनोद पाठक, जितेंद्र प्रधान एवं प्रेसक्लब के पदाधिकारियों समेत कई वरिष्ठ पत्रकारों की उपस्थिति रही।