जनकल्याण हेतु हमारे पूर्वजों ने अपने शरीर को बनाया प्रयोगशाला: प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी


राष्ट्र सम्मत/ प्रयागराज। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गङ्गानाथ झा परिसर प्रयागराज में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन आज परिसर के मुख्य सभागार में सम्पन्न हुआ।

समापन सत्र में मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी पूर्व कुलपति काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, सारस्वतातिथि प्रो. के. रामचन्द्र रेड्डी, कुलपति, महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय, गोरखपुर, विशिष्ट अतिथि प्रो. केदारनाथ, प्राचार्य, लाल बहादुर शास्त्री स्मारक राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, हण्डिया, प्रयागराज ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति एवं सारगर्भित सम्बोधन से छात्र-छात्राओं को आयुर्वेद की समृद्ध परम्परा से परिचित कराया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो. गिरीन्द्र सिंह तोमर ने की। संस्थान के प्रभारी निदेशक डॉ रामकृष्ण पाण्डेय ने आयुर्वेद को हर घर की रसोई में विद्यमान बताया ।

मुख्य अतिथि प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने आयुर्वेद एवं संस्कृत के प्रगाढ़ सम्बन्ध की शास्त्राधारित चर्चा की। उन्होंने पूर्वजों द्वारा स्वयं के शरीर को प्रयोगशाला बनाकर आयुर्वेद के रहस्यों को जनकल्याण हेतु प्रस्तुत किया। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. गिरीन्द्र सिंह तोमर ने आयुर्वेद के क्षेत्र में हो रहे नित नये शोध को आयुर्वेद की लोकप्रियता का परिचायक बताया एवं हाल ही में दिल्ली में आयोजित आयुर्वेद सम्मेलन में अश्वगन्धा की विशिष्ट चर्चा की। उन्होंने कहा कि अश्वगंधा पर 20000 से भी अधिक शोध पत्रों के प्रकाशन का उल्लेख किया।

कार्यशाला के वैज्ञानिक सत्र में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज हंडिया के शल्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा का इतिहास महर्षि सुश्रुत से जुड़ा हुआ है जिन्हें शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है। महर्षि सुश्रुत ने शल्य प्रक्रियाओं, उपकरणों और तकनीकी जैसे मोतियाबिंद, प्लास्टिक सर्जरी का वर्णन किया। 

राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, हंडिया के चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीश पांडेय ने जीवनशैली जन्य व्याधि में उपयोगी वैदिक कालीन वनौषधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उपस्थित विद्वतजनों एवं छात्र-छात्राओं को परिसर के निदेशक प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने ऑनलाइन माध्यम से सम्बोधित करते हुए सभी को कार्यशाला की सफलता हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।

इसके पूर्व कार्यशाला के संयोजक प्रो. देवदत्त सरोदे ने कार्यशाला का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए इसे अत्यधिक सफल बताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. यशवन्त त्रिवेदी ने किया। इस अवसर पर प्रो. मनोज कुमार मिश्र, डॉ. अवनीश पाण्डेय, डॉ. सुरेश पाण्डेय, सुश्री अश्विनी लंके, श्री राजेशकान्त तिवारी समेत परिसरीय समस्त कर्मचारी एवं अधिकारीगण तथा देश के विभिन्न प्रान्तों से कार्यशाला में भाग लेने वाले शोधच्छात्र एवं प्राक्शोध पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राएँ समेत अन्य परिसरीय छात्र-छात्राएँ समुपस्थित रहे।
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